
जिसमे सिमटा है पूरा जहाँ,
इस शब्द जैसा और.. कोई ?कहाँ?
प्यार है इसका चांदनी रात ,
लगता न ग्रहण उस प्यार में,
रहती हमेशा पूनम सी धवल छाया ,
दूधिया ज्ञान की रौशनी में ,इसके
बनती है एक इंसानी काया ,

रहता जिसका आशीर्वाद ,
बनकर हमारा साया ,
गंगा से भी निर्मल,पावन है,
जिसका आंचल.....
नयनों से बरसती है ममता,
क्या इंसान,क्या पशु...
सबका मन उसी में रमता,
है क्या?कोई भाग्यशाली हमसा ....
वेदांश...
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